tag:blogger.com,1999:blog-1264869937543847233.post-20557921761108769542006-12-20T15:24:00.000+05:302006-12-20T15:24:55.532+05:30विद्यार्थी जीवन के सुपरहिट संवाद<span style="color:#000000;">मैं आज आपके सामने विद्यार्थी जीवन के सुपरहिट संवादों को लेकर हाज़िर हूँ.</span><br /><br /><span style="color:#000000;">संवाद काल, वातावरण और जगह के अनुसार बदल सकते हैं,..मगर मूल भावना कमोबेश यही होती है....</span><br /><span style="color:#000000;"></span><br /><span style="color:#000000;">आप भी आनन्द लिजिये. (एक मेल द्वारा प्रेरित)</span><br /><span style="color:#000000;"></span><br /><strong><span style="color:#3333ff;">१. कक्षा में देर होने पर</span> </strong><br /><br />"कब चालू हुआ?"<br /><br />"अटेण्डेन्स हो गया क्या?"<br /><br />"कल रात देर तक गप्पे मारते रहे यार"<br /><br />"मैं क्या करूँ, कुमार बाथरूम में घुसा हुआ था"<br /><br />"अब नींद नहीं खुली तो मैं क्या करूँ, ...बोल न,.....कल क्या पढाया था सर ने"<br /><br />"अब पक्का कल से क्लॉस करूँगा."<br /><br />"एक पेज़ दे न,.....अरे यार, पेन भी तो दे..."<br /><br />'कल प्रॉक्सी मारा था क्या?'<br /><br />'यार इस क्लॉस के लिए भी कोई सुबह उठ सकता है....."<br /><br /><strong><span style="color:#3333ff;">२. क्लॉस के समय</span></strong><br /><br />"यस!! सर , द अन्सर इज़ ..हम्मम्मम्म.....आ आ आ..."<br /><br />"नो सर, आई नो द अन्सर...आ, द अन्सर इज़ ....."<br /><br />" ये प्रोफेसर अपने आपको न्यूटन समझता है"<br /><br />"अरे यार, लेक्चर को छोड....अन्जली क्या लग रही है आज...."<br /><br />"उसके बगल में नहीं बैठ सकता था....गधा......"<br /><br />"मेरा असाइनमेन्ट तेरे पास ही है न?"<br /><br />"अगर हेड आया तो कैन्टीन चलते हैं, अगर टेल आया तो अभी तुरन्त कैन्टीन चलेंगे!!"<br /><br />"बॉस , क्लास खत्म होते ही चाय चाहिए......"<br /><br /><br /><strong><span style="color:#3333ff;">३. लैब में</span></strong><br /><br />"एक्सपेरिमेन्ट २ लिखा??"<br /><br />"इधर करना क्या है??"<br /><br />"ए भाई,.....मेरे को आता तो तेरे पास क्यूँ आता......बता न...."<br /><br />"अरे तू तो बुरा मान गया......डाटा दिखा न........"<br /><br /><br /><strong><span style="color:#3333ff;">४. यूनिट टेस्ट</span> </strong><br /><br /><br />"यूनिट टेस्ट ???? .....अरे यार...... "<br /><br />"क्या......अबे यूनिट टेस्ट में इतना टॉपिक है तो फाईनल में क्या होगा...."<br /><br />"बॉस,...हो गया....और नहीं हो सकता.......मैं जान नहीं दे सकता......."<br /><br />"ओह, ..इतना सिलेबस हो चुका.....?"<br /><br />"अरे , आज कौन सा टेस्ट है?"<br /><br />"ओए, सन्जीव कहाँ है, .....उसका रॉल न. मेरे बाद है,...वो नहीं आया तो मैं पक्का फेल....."<br /><br /><br /><strong><span style="color:#3333ff;">५. परीक्षा</span></strong><br /><br />" जो (मुझे) आता है, वो (पेपर में) नहीं आता, जो नहीं आता , वही आता है"<br /><br />" ये प्रश्न दो साल से नहीं आया है.."<br /><br />"अरे नहीं, ये लास्ट टाईम ही तो आया था......१० न. के प्रश्न को ३ न. में डाल दिया था"<br /><br />"नहीं समझा तो रट ले"<br /><br />"पिछले पेपर में कुछ तो आता था.....इसमें तो अण्डा आता है......"<br /><br />" एक और दिन का गैप दे देता तो थर्ड वर्ल्ड वार हो जाता क्या......."<br /><br /><br /><strong><span style="color:#3333ff;">६. परीक्षा के बाद</span></strong><br /><br /><br />"ये भी सिलेबस में था क्या?"<br /><br />"अच्छा!! ये ऐसे होता है क्या....?"<br /><br />" पहले में ३ मार्क्स , दूसरे में ज़ीरो, तीसरे में २, ...गया.....पक्का फेल इस बार....."<br /><br />"यार नोटिस लगते ही फाड देना...........वो क्या सोचेगी मेरा मार्क्स देखकर......"<br /><br /><br /><strong><span style="color:#3333ff;">७. वाईवा</span></strong><br /><br />"सबमिशन अब तक हुआ नहीं है, वाईवा क्या घन्टा दूँगा.."<br /><br />"ऐ ...रोहित.....तेरे से क्या पूछा....."<br /><br />"एक्सटर्नल के घर में बच्चे नहीं हैं क्या...?"<br /><br />"देख बॉस !! एक्सटर्नल भी आदमी है, उसको पता है स्टूडेन्ट्स की अब तक तैयारी नहीं हुई है....."<br /><br />"देख, तू जो भी पढेगा , वो तेरे से नहीं पूछा जाएगा, तो जान किसलिए दे रहा है?"<br /><br /><br /><strong><span style="color:#3333ff;">८. सबमिशन</span></strong><br /><br />"ये भी छापना है क्या?"<br /><br />"इसका भी प्रिन्ट-आउट लेना है क्या?"<br /><br />"जय हो कम्प्यूटर बाबा की....जय हो Ctrl C - Ctrl V की......"<br /><br />"तूझे सर का साईन मारना आता है क्या?"<br /><br />"ये तूने लिखा क्या है???"<br /><br />"जो वर्ड समझ में आ रहा है वो लिख,...जो नहीं आ रहा उसकी ड्राईंग कर दे...."<br /><br />"फिर भी, कुछ तो आइडिया होगा??"<br /><br />" अरे मैंने सन्दीप से लिखा था, मेरा तो चेक भी हो गया, तू भी वही कर दे."<br /><br />"कोई हिन्ट......."<br /><br />"अरे बाबा, घसीट दे......न तू समझेगा न वो.....<br /><br /><br /><span style="font-size:130%;color:#cc0000;"><strong>आपने कभी ऐसे संवाद बोले या नहीं?</strong></span><div class="blogger-post-footer"><img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1264869937543847233-2055792176110876954?l=chintankan.blogspot.com'/></div>दीपक । Deepakhttp://www.blogger.com/profile/00907964319707386079quitesecret@gmail.com13